
अल्फ़ाज़ बना बंधन
एक कोहिनूर को ऐसे देखा, नज़रें मेरी उस शख़्स से हट नहीं पाई,
धड़कनें ऐसे थमी जैसे, मानो मौसम ने ली यूँ ग़ज़ब अंगड़ाई |
उसकी महकती ख़ुशबू की लहर, मेरी रूह को अपनी तरफ़ खींची ले आई,
उसके आ जाने से लगने लगा, मेरी अंधेरी भरी ज़िंदगी में एक रोशनी है छाई |
कोरे काग़ज़ों पर उस आशिक़ की, दिल से लिखी दस्तक छाप के आई,
लिखता था वो जिस मासूम चेहरे के लिए, जिससे उस आशिक़ के कभी दिल की भनक भी नहीं आई |
पर एक दिन कुछ हुआ ऐसा, उस आशिक़ की लिखी हुई शायरी उसके हाथों आई,
उस दिल के मुसाफ़िर ने, तस्वीर से उसकी अपनी किताबें सजाई |
जहाँ था बस एक तरफ़ा इश्क़, ऊपर वाले ने लिख कर यह जोड़ी बनाई,
इश्क़ की दस्तक पर दोनों ने, सात जन्मों में साथ रहने की क़सम है खाई |
~KRISH JAIN
मेरा मना हुआ इश्क़
तेरी आँखों में देखा था मैंने अपना जहाँ,
एक ऐसा ख्वाब, जो आज भी है वहाँ।
हर नज़र में तेरी, था एक पैगाम,
खामोश लफ़्ज़, फिर भी लेते थे तेरा ही नाम।
अब तक याद हैं, वो बातें तेरी,
छोटे-छोटे झगड़े, वो मुलाकातें मेरी।
वो पल जो तुझ संग बिताए थे,
दिल के हर कोने में छुपाए थे।
एक बार तेरा चेहरा फिर देख सकूं,
दिल के अरमां तुझसे कह सकूं।
इज़हार करूं, जो बरसों से दबा है,
चाहे जवाब तेरा, खामोश ही रहा है।
तू पहली मोहब्बत, मेरा पहला ख्वाब,
मना हुआ इश्क़, फिर भी ला-जवाब।
वक़्त गुज़र जाए, तू यादों में रहे,
तेरा नाम हर आहट में बहे।
दो साल बीते, पर आवाज़ तेरी,
अब भी गूंजती है, मेरी तन्हाई में कहीं।
बस एक बार तुझसे मिल पाऊं,
अपने दिल का हाल सुना पाऊं।
मुझे पता है, तेरा जवाब होगा ‘नहीं’,
पर इस बोझ से रिहा हो जाऊं यहीं।
तेरा इन्कार भी दिल को राहत देगा,
इस खामोश इश्क़ को सुकून मिलेगा।
मना हुआ इश्क़, एक दर्द भरी कहानी,
यह इश्क़ था अधूरा और मेरी ही ज़ुबानी।
मेरी दिल की तन्हाई का दर्द वही है,
तू दिल में होकर भी अब नहीं है।
~RIDHIMA ARORA
Mohabbat ke siwa!
Aur bhi baatein hai krne ko mohabbat ke siva!
Ye mohabbat krna zaruri hai kya?
Sochti hu tanha guzare ab kuch pal
Ek ladke ke bina zindagi adhuri hai kya?
Aur bhi toh baatein hai duniya jahaan ki krne ko
Ek mohabaat ki hi baat krna zaruri hai kya?
Jaate hai kyu hum laut kr ek hi shaqs ke paas
Kya hua?
Kuch majboori hai kya?
~LAKSHITA TANEJA
प्यार का इज़हार
अच्छा सुनो,
मैं उससे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ क्या?
सुना है, ज़िन्दगी थोड़ी छोटी होती है,
मैं अपनी सारी उम्र उसके नाम कर दूँ क्या?
दिल ही दिल में एक डर है,
मेरा चुना रास्ता थोड़ा मुश्किल है,
अगर वो हाँ बोले, तो मैं उसे अपनी हर सुबह, हर शाम कर दूँ क्या?
मुँह से जो लफ़्ज़ निकले उसके लिए,
वो एक-एक लफ़्ज़ को अपनी दुनिया में सजा दूँ क्या?
मैं उसे अपनी दुनिया बना दूँ क्या?
जैसे वो मुझे अपने प्यार की पहेलियों में उलझाती है,
वैसे ही मेरी सारी मुश्किलें भी सुलझाती है,
मैं उसके दिल के मुकाम को हासिल कर लूँ क्या?
मैं उससे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ क्या?
-वंतिका
Bezubaan Si Dosti
Ek waqt tha,
har baat keh jaate the,
Aaj milte bhi hain,
toh sirf muskura ke reh jaate hain.
Na gila, na shikwa,
Bas ek khamoshi hai jo sab keh jaati hai.
Dosti thi… ab yaad aati hai.
~khushi
दोस्ती की डोरी
दोस्ती एक प्यारा सा एहसास होती है,
दिल से दिल की खास बात होती है।
न उम्र की बंदिश, न जाने की डोर,
हर दर्द को बाँट ले, वो रिश्ता है अनमोल।
हँसी में शामिल, ग़म में भी साथ,
सच्चे दोस्त ही तो हैं सबसे बड़ी बात।
ना कोई शक, ना कोई दिखावा,
दोस्ती में बस होता है प्यार का बहाव।
जब राहें मुश्किल हों या हों अँधेरे,
दोस्त ही तो रोशन करें उम्मीद के फेरे।
जिनके संग हर दिन एक त्योहार लगे,
ऐसी दोस्ती हर दिल को एक उपहार लगे।
~Khush

